गुरुवार, 12 जनवरी 2017

विर गॉथा...वो कहा चले गए ? लेखक ~कुं.रतन सिंह जी मोयणा

                            लेखक~परिचय
कु.श्री मान रतन सिंह जी बल्ला ( मोयणा) कुम्भलगढ राजसमन्दं !
मेवाड कि धन्य- धरा पर अपनी आन- बान के रक्षक अपनी धरती मांता के नाम अपने प्राण बलिदान देने वाले महाराणा प्रताप कि जन्म स्थली आज भी हमे ये अतित के पन्नो मे हम याद करते है !

                   ~•~•~•~•~•~ विर गॉथा.....वो कहा चले गए•~•~
                                      ( १)
मुठी भर सेना के दम पर' जिसने दिल्ली का तख्त हिला दिया !
    - आज ये हल्दी-घाटी पुछती हे" वो महाराणा प्रताप कहा गये !!
                                     ( २ )

* अपने सत्तीत्व की रक्षा के लिए' जिसने अग्नि संग ब्याह रसाया !
- आज ये चित्तौड के खण्डर पुछते हे" वो रानी पद्मिनी कहा गई !!
                                   ( ३ )

* अपने स्वामी के पुत्र के लिए' जिसने अपने चन्दन को भुला दिया !
- आज ये कुम्भलगढ की धरा पुछती हे" वो पन्ना गुर्जरी कहा गई !!
                                    (४ )

* अपना निज धर्म भुलकर- " जिसने  राणा का साथ दिया !
आज ये हल्दी घाटी का मेदान पुछता है" वो हकिम सुरी कहा गए!!
                                 ( ५ )

* सकंट मे देख राणा को " जिसने राणा का साथ दिया !
 - आज ये रक्त तलाई पुछती हे " वो चेतक कहा गया !!
                                ( ६ )

* देख कर सकंट मे भाई को " जिसका ह्रदय बदल गया !
- आज ये मेवाड पुछता हे ' वो भाई शक्ती सिंह कहा गया !!
                                ( ७ )

* जिसकी भक्ती का सागर बहता था " पुरे राजपुताना मे...!
- आज ये मेवाड-मारवाड पुछता हे" वो मिरा बाई कहा चले गए !!
                                ( ८ )

*घास कि रोटी खाते देख अमर को " जिसने अपना खजाना राणा को सोप दिया.............................!
- आज ये देश पुछता है " वो भामाशाह कहा गए !!
                               ( ९)

* जब भी अतित के पन्नौ को " मे देखता हु !

तो सोचता हु" ओ मन के राजा रतन सा" वो बहादुर लोग कहा गए

             ( लेखक- कुं.रतन सिंह जी बल्ला मोयणा )
  जय मैवाड जय चित्तौड- जय महाराणा प्रताप जय राजपुताना

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